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जाति जनगणना को लेकर मोदी सरकार का ऐतिहासिक निर्णय: मोहनलाल बडोली @dainik jagruk


सोनीपत (कुलदीप रंगा)
भाजपा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष  मोहनलाल बडोली ने आज सेक्टर-15 स्थित अपने निवास पर एक पत्रकार वार्ता आयोजित की, जिसमें उन्होंने जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णय पर विस्तार से जानकारी दी।

बडोली ने कहा कि आज़ादी के बाद से अब तक की सभी जनगणनाओं में जातियों की गणना नहीं की गई। वर्ष 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने लोकसभा में जाति जनगणना पर विचार का आश्वासन दिया था, और एक मंत्रिमंडलीय समूह का गठन भी किया गया था। अधिकांश दलों ने उस समय जाति आधारित जनगणना की संस्तुति की थी, इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने इसे जनगणना के रूप में न करते हुए एक सीमित सर्वेक्षण (SECC) के रूप में किया, जिससे केवल भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस व उसके सहयोगी ‘इंडी गठबंधन’ ने जाति जनगणना के विषय का उपयोग केवल अपने राजनीतिक हितों के लिए किया है, जबकि संविधान के अनुच्छेद 246 की केंद्रीय सूची की क्रम संख्या 69 के अंतर्गत जनगणना केंद्र सरकार का विषय है।

 बडोली ने आगे कहा कि कुछ राज्यों ने सर्वे के माध्यम से जातियों की गणना का प्रयास किया, किंतु इनमें से कई सर्वेक्षण पारदर्शिता से दूर और राजनीतिक प्रभाव में किए गए, जिससे समाज में भ्रम और असमानता की भावना फैली।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि जातियों की गणना किसी सीमित सर्वे के रूप में नहीं, बल्कि मुख्य जनगणना प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हो। इससे सामाजिक न्याय और समावेश सुनिश्चित होगा, और देश की सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति को सुदृढ़ आधार मिलेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि आज दिनांक 30 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजनीतिक मामलों की केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने यह निर्णय लिया है कि आगामी जनगणना में जातियों की गणना को शामिल किया जाएगा। यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार समाज के समग्र हितों और मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अंत में  बडोली ने कहा कि भाजपा सरकार जब भी गरीब, पिछड़े और समाज के वंचित वर्गों की बात करती है, तो उसका उद्देश्य समाज में समरसता बनाए रखना होता है उन्होंने कहा कि इसका उदाहरण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के समय देखा जा सकता है, जब समाज के किसी भी वर्ग में कोई तनाव नहीं उत्पन्न हुआ।

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