head> सोनीपत: ‘… एंड, देन आई चूस नोट टू डाई!’ पुस्तक का विमोचन | आत्म-प्रेरणात्मक लेखनी
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‘… एंड, देन आई चूस नोट टू डाई!’ पुस्तक का विमोचन, जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेने का संदेश


“विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत में कुलपति प्रो.(डॉ.) देविन्द्र सिंह ने डॉ. मीनाक्षी सहरावत की आत्म-प्रेरणात्मक पुस्तक ‘… एंड, देन आई चूस नोट टू डाई!’ का विमोचन किया।”

सोनीपत, 18 अगस्त (DAINIK JAGRUK):(kuldeep ranga)

‘.... एंड, देन आई चूस नोट टू डाई!‘ पुस्तक जीवन के लिए आत्म-प्रेरणात्मकः प्रो.(डॉ.) देविन्द्र सिंह, कुलपति।
सोनीपतः- डॉ. बी.आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत में विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) देविन्द्र सिंह की अध्यक्षता में ‘.... एंड, देन आई चूस नोट टू डाई!‘ नाम  की पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम किया गया, इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) देविन्द्र सिंह ने पुस्तक की लेखिका डॉ. मीनाक्षी सहरावत को बधाई दी, तथा कहां यह पुस्तक जीवन के लिए आत्म-प्रेरणात्मक है, जिसमें लेखिका द्वारा अपने व्यक्तिगत अनुभवों को इस पुस्तक के माध्यम से यह दर्शाने की कोशिश की है कि जीवन के सबसे गंभीर परिस्थितियों में भी आशा और संघर्ष का रास्ता चुना जा सकता है। जब कोई व्यक्ति आर्थिक, सामाजिक और कई प्रकार की कठिनाइयों से जूझता है, तब समाज भी उसके प्रति अपना दृष्टिकोण बदल लेता है। कुलपति ने कहां हमें सभी को इस पुस्तक को पढकर उन अनुभवों को अपने अन्दर ग्रहण करना चाहिएं ओर जीवन में कभी भी निराश नहीं होना चाहिएं। हमें उन सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करना चाहिएं, जो हमें आगे बढ़ने एवं हमारे आत्म विश्वास को कमजोर करती है। 
इस पुस्तक के विमोचल के उपलक्ष्य में इस पुस्तक की लेखिका डॉ. मीनाक्षी सहरावत ने कहां में इस विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) देविन्द्र सिंह, कुलसचिव प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा का बहुत आभार व्यक्त करती हुँ जिन्होंने मेरे द्वारा लिखी पुस्तक का विमोचन हेतु अपना कीमती समय दिया, जिससें मेरे आत्म विश्वास को ओर अधिक बल मिला है। लेखिका ने कहां मैने अपने जीवन में डर और असुरक्षा का बहुत आभास किया हैं-चाहे वे आर्थिक हों, सामाजिक हों या भावनात्मक। मैने जीवन में यह भी अनुभव किया है कि प्रत्येक व्यक्ति के पास दो प्रकार की संपत्तियाँ होती हैं, पहली सम्पति ‘दृश्य संपत्ति जैसे कि धन, संसाधन, सुविधाएँ इत्यादि और दूसरी संपत्ति है ‘अदृश्य संपत्ति-शिक्षा, अनुभव, व्यक्तित्व और जीवन के मूल्य-मंत्र इत्यादि। हमें जीवन में इन्हीं अदृश्य संपत्तियों के सहारे कठिनाइयों को पार करने की क्षमता मिलती है। संघर्ष केवल पीड़ा नहीं देते, बल्कि वे अपने आत्म विश्वास को पहचानने, सीखने और आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। मेरे द्वारा लिखी पुस्तक यह संदेश देती है कि जीवन में सफलता प्राप्त नहीं होती, लेकिन हमें कोशिश रखना बहुत अहम है। लेखिका ये भी कहां कैटरपिलर की तितली तरह, हर यात्रा विकास, रोमांच और सुंदरता से भरी होनी चाहिए। अगर आप जीवन में असफल हो जाओ, गिर जाओ तो हमें हार नहीं माननी चाहिएं बल्कि फिर उठो, अपने पंख फैलाओ और बिना शर्मिंदगी अपने जीवन को अपनाओ-क्योंकि आप मायने रखते हैं। आपके सपने, आपकी आवाज़, आपकी यात्रा सब मूल्यवान हैं।”
इस कार्यक्रम के उपलक्ष्य में विधि विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा ने कहां इस पुस्तक में संभावना की शक्ति, पूर्णता, सफलता से जुड़े मिथक और प्रचार संस्कृति, एकांत, मूल्य-प्रणाली जैसे पहलुओं पर भी गहन विचार किया गया है। यह पुस्तक न केवल पढ़ने योग्य है, बल्कि इस पाठक को हम अपने जीवन में स्वयं को किसी न किसी रूप में अवश्य पाएँगे। हम सभी एक जीवन में, हम कई जीवन जीते हैं। कुलसचिव द्वारा डॉ. मीनाक्षी सहरावत को ढेरों शुभकामनाएं दी तथा विधि विश्वविद्यालय की ओर से हर तहर से सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर कुलपति के निजी सचिव राजेश कुमार, ललित कुमार, जन सम्पर्क अधिकारी, डॉ. प्रियतोष शर्मा आदि उपस्थित रहे। 

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