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जे.जी.यू. में शालू जिंदल परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी का भव्य उद्घाटन, सांस्कृतिक शिक्षा को मिली नई दिशा


सोनीपत, 16 फरवरी 2026:(DAINIK JAGRUK) ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जे.जी.यू.) में शालू जिंदल परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी का उद्घाटन किया गया। यह एक बड़ी नई एकेडमिक और कल्चरल फैसिलिटी है जो एक मल्टीडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी माहौल में परफॉर्मिंग आर्ट्स एजुकेशन, आर्टिस्टिक रिसर्च और पब्लिक कल्चरल एंगेजमेंट को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है।
प्रदर्शन, शिक्षण और सांस्कृतिक संवाद के लिए विशेष रूप से निर्मित इस अकादमी में प्रोसीनियम मंच, उन्नत ध्वनिकी व्यवस्था, सीढ़ीनुमा बैठक व्यवस्था और समेकित दीर्घा स्थल उपलब्ध हैं। यहाँ प्रस्तुतियाँ, प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ और अंतर्विषयी सहयोग आयोजित किए जाएँगे। यह विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, आगंतुक कलाकारों और व्यापक समुदाय के लिए सृजनात्मक मंच प्रदान करेगी तथा उच्च शिक्षा में कला की भूमिका को सुदृढ़ करेगी।
उद्घाटन समारोह में प्रख्यात कुचिपुड़ी आचार्य और पद्म भूषण सम्मानित डॉ. राजा रेड्डी, डॉ. राधा रेड्डी और डॉ. कौशल्या रेड्डी उपस्थित रहे। उनके साथ जिंदल फाउंडेशन की अध्यक्षा सुश्री शालू जिंदल तथा जेजीयू के कुलाधिपति श्री नवीन जिंदल भी समारोह में शामिल हुए।
डॉ. राजा रेड्डी ने शास्त्रीय कलाओं के लिए संस्थागत मंचों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि समर्पित शैक्षणिक स्थल भारत की कलात्मक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और आने वाली पीढ़ियों को अनुशासित एवं सार्थक सृजन के लिए तैयार करते हैं।
सुश्री शालू जिंदल ने कहा कि यह अकादमी इस विश्वास को दर्शाती है कि कला समाज को अधिक संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और संतुलित बनाती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह स्थल विद्यार्थियों को अनुशासन, सृजनशीलता और सेवा भाव से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।
श्री नवीन जिंदल, संस्थापक कुलाधिपति, ओ.पी. जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय, ने समग्र शिक्षा में कला की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को बौद्धिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सांस्कृतिक और कलात्मक संवेदनशीलता का भी पोषण करना चाहिए। यह अकादमी शिक्षा, संस्कृति और सृजनशीलता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति जेजीयू की प्रतिबद्धता को और सशक्त करती है।
ओ.पी. जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार ने बताया कि इस अकादमी का नाम सुश्री शालू जिंदल के सांस्कृतिक परोपकार, कला प्रदर्शन और संस्थान निर्माण में दीर्घकालीन योगदान के सम्मान में रखा गया है। जिंदल फाउंडेशन तथा अन्य पहलों के माध्यम से उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और पारंपरिक कलाओं के संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। यह पहल जेजीयू में संगीत, नृत्य, रंगमंच और अन्य प्रदर्शन कलाओं के पाठ्यक्रमों के साथ एक नए परफॉर्मिंग आर्ट्स स्कूल की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिसमें अनुभवात्मक अधिगम पर विशेष बल होगा।
शालू जिंदल परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी जेजीयू के व्यापक सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधोसंरचना का हिस्सा है और जिंदल इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (जेआईसीसी) सहित अन्य शिक्षण सुविधाओं का पूरक है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सार्वजनिक संवाद आयोजित होते हैं। ये सभी सुविधाएँ मिलकर विश्वविद्यालय के उस दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती हैं जिसमें शैक्षणिक अनुसंधान और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का समन्वय हो।
इस भवन की वास्तु परिकल्पना श्री स्टेफ़ान पाउमियर द्वारा की गई है, जिनकी दृष्टि ने इसे विशिष्ट पहचान प्रदान की है। बहुमंजिला इस भव्य संरचना में अत्याधुनिक 1000 दर्शकों की क्षमता वाला सभागार तथा चौबीस दीर्घाएँ हैं, जहाँ विविध प्रस्तुतियाँ, प्रदर्शनियाँ और सृजनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं।
शालू जिंदल परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी के शुभारंभ के साथ ओ.पी. जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा में कला और संस्कृति को समाहित करने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। विश्वविद्यालय को ऐसे स्थल के रूप में स्थापित किया जा रहा है जहाँ सृजनात्मक साधना, विद्वत्ता और सार्वजनिक सहभागिता साथ-साथ आगे बढ़ें।
समारोह के समापन अवसर पर जेजीयू के कुलसचिव प्रोफेसर दबीरू श्रीधर पटनायक ने कहा, “यह उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण है और पूरे जेजीयू समुदाय के लिए सांस्कृतिक विरासत की नई शुरुआत है, क्योंकि कला आत्मा को सशक्त करती है और मानवता को ऊँचा उठाती है।

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